12 minutes | May 28, 2021

Vinod Kumar Shukla : Hare Patte Ke Rang Ki Patrangi Aur Kahin Kho Gaya Naam Ka Ladka

Vinod Kumars Shukla's writing,like him, is calm, unassuming and yet scratch the surface and a magical world opens up. His magic realism is grounded in middle class nuances and his language is one that gives voice to silences.  Do check out these links to know more: Indian Express: https://indianexpress.com/article/express-sunday-eye/inside-the-wondrous-world-of-writer-vinod-kumar-shukla-6266660/ https://www.youtube.com/watch?v=G8admywihYs https://www.youtube.com/watch?v=T0nMcJVJ1IY&t=96s ..... हिंदी के प्रसिद्ध कवि और उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल जा जन्म 1 जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव में हुआ। उनकी साहित्यिक शैली अपने से पहले और अपने समकालीन रचनाकारों से एकदम भिन्न है और शायद इसीलिए उनके लेखन ने पाठकों को इतना प्रभावित किया है । उनकी शैली को 'जादुई-यथार्थ' का एक रूप मन गया है। उनका पहला कविता संग्रह 1971 में 'लगभग जय हिन्द' नाम से प्रकाशित हुआ ! 1979 में 'नौकर की कमीज़' नाम से उनका उपन्यास आया जिस पर फ़िल्मकार मणिकौल ने इसी से नाम से फिल्म भी बनाई। विनोद कुमार शुक्ल को उपन्यास 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' के लिए वर्ष 1999 का 'साहित्य अकादमी' पुरस्कार से सम्म्मानित किया गया। वे अपनी कविताओं में संवेदनात्मक गहराई के लिए जाने जाते हैं। वे कवि होने के साथ-साथ शीर्षस्थ कथाकार भी हैं। उनके उपन्यासों ने एक मौलिक भारतीय उपन्यास को राह दिखाई है। मध्यवर्गीय जीवन की बारीकियों भरे उनके काल्पनिक चरित्रों का भारतीय साहित्य को और समृद्ध बनाने में  बहुत बड़ा योगदान है। वे अपनी पीढ़ी के ऐसे अकेले लेखक हैं, जिनके लेखन ने एक नयी तरह की आलोचना दृष्टि को बनाने की प्रेरणा दी है।  वे ऐसे बहुचर्चित लेखक हैं जिनकी गहरी संवेदना, भाषा की विशष्टता और अलग सृजनशीलता ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। --- Send in a voice message: https://anchor.fm/storyjam/message
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