14 minutes | May 14, 2021

StoryJam Kahani: Haar ki Jeet

जब मन व्याकुल और अस्थिर हो, तब चित्त को शांत करने का एक नुस्खा है की पुरानी कहानियां सुनी-सुनाई जाये। अतीत की शीतल छाओं में, सरल शब्दों के झूले में, कुछ देर मस्तिष्क को सुस्ताने दें, वहां जहाँ कोरोना का दैत्य अपनी भुजाएं नहीं फैला सकता।  आने वाले दिन हम सभी को दुःख, असहायता और पीड़ा से निवृत्ति दिलाएं, इस कठिन समय में हमें सही मार्ग दिखे और हम हौसले से उसपर आगे बढे, इसी कामना के साथ, सुदर्शन की ये कहानी, "हार की जीत"  --------------- सुदर्शन जीवन परिचय:   सुदर्शन को प्रेमचन्द परम्परा का कहानीकार माना हैं। इनका जन्म सियालकोट  में में हुआ था औरइनका असली नाम बदरीनाथ था। इनका दृष्टिकोण सुधारवादी और  यथार्थवादी हैं। मुंशी प्रेमचंद और उपेन्द्रनाथ अश्क की तरह ही सुदर्शन भी  हिन्दी और उर्दू, दोनों भाषाओँ में लिखते थे। उनकी गणना प्रेमचंद केसाथ साथ  विश्वम्भरनाथ कौशिक, राजा राधिकारमणप्रसाद सिंह, भगवतीप्रसाद वाजपेयी आदि  के साथ की जाती है। अपनी प्रसिद्ध कहानियों में सुदर्शन जी ने समस्यायों का  आदशर्वादी समाधान देने का प्रयास किया है।   कहानीकार सुदर्शन जी को जाट गजट के संपादक रहे। लाहौर की उर्दू पत्रिका  'हज़ार दास्ताँ' में उनकी अनेकों कहानियां छपीं। उनकी पुस्तकें मुम्बई के  हिन्दी ग्रन्थ रत्नाकर कार्यालय द्वारा भी प्रकाशित हुईं। उन्हें गद्य और  पद्य दोनों ही में महारत थी। "हार की जीत" पंडित जी की पहली कहानी है और  १९२० में सरस्वती में प्रकाशित हुई थी।  सुदर्शन जी के लेखन में भाषा सरल और स्वाभाविक होती है।   साहित्य-सृजन के अतिरिक्त उन्होंने अनेकों फिल्मों की पटकथा और गीत भी लिखे  हैं। सोहराब मोदी की 'सिकंदर'सहित अनेक फिल्मों की सफलता का श्रेय उनके  पटकथा लेखन को दिया जाता है। सन 1934 में उन्होंने "कुंवारी या विधवा"  फिल्म का निर्देशन भी किया। वे 1940 में बने फिल्म लेखक संघ के प्रथम  उपाध्यक्ष थे। फिल्म धूप-छाँव (1938) के प्रसिद्ध गीत तेरी गठरी में लागा  चोर, बाबा मन की आँखें खोल आदि उन्ही के लिखे हुए हैं।  वे महात्मा गांधी द्वारा प्रस्तावित अखिल भारतीय हिन्दुस्तानी प्रचार सभा  वर्धा की साहित्य परिषद् के सम्मानित सदस्यों में थे।    ----------------------  प्रमुख रचनायें :  तीर्थ-यात्रा पत्थरों का सौदागर पृथ्वी-वल्लभ --- Send in a voice message: https://anchor.fm/storyjam/message
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